यातायात नियमों का प्रशिक्षण एवं प्रचार

यातायात नियमों का प्रशिक्षण एवं प्रचार

बच्चे देश की अमूल्य धरोधर व देश का भविष्य हैं, जिनकी रक्षा किया जाना हमारा परम कर्तव्य है। बच्चो को शिक्षित कर ही हम भविष्य के लिए अच्छे नागरिक तैयार कर सकते हैं।

1. यातायात नियम

  • जब आपके पास एक वैध ड्राइविंग लाइसेंस न हो, आप मोटर गाड़ियो को नहीं चलायेंगे।
  • दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग करेंगे।
  • दो पहिया वाहनों पर चालक सहित 02 से अधिक व्यक्तियों के साथ कभी सवारी नहीं करेंगे।
  • कार या चार पहिया वाहन चलाते समय सदैव सीटबेल्ट पहनेंगे।
  • अपने वाहन को केवल अधिकृत पार्किंग स्थल पर ही पार्क करेंगे।

2. स्कूल बस/वैन/कार/तिपहिया वाहन से आने-जाने में

  • समय से घर से निकलें, जिससे बस पकड़ने के दौरान दौड़ना न पड़े।
  • बस स्टैण्ड पर सदैव लाइन में खडें रहें। जब बस हाल्ट पर आ जाये तभी बिना दौड़े व दूसरों को धक्का-मुक्की किये बिना बस में चढ़े।
  • वाहन में से शरीर का काई अंग बाहर न निकालें।
  • वाहन में कोई अनजान या अवांछित वस्तु दिखने पर चालक को सुचित करें।

3. दो पहिया वाहन पर आने-जाने में

  • बिना लाइसेंस व निर्धारित से कम उम्र में वाहन चलाना कानूनन अपराध है।
  • वाहन के रजिस्ट्रेशन, पीयूसी, इन्श्योरेंस आदि अपने पास अवश्य रखें।
  • दो पहिया वाहन चलाते समय अच्छी क्वालिटि के आई0एस0आई0 मार्क के हेलमेट का प्रयोग करें एवं हेलमेट के चिन स्ट्रेप को कसकर बांधे।

4. साइकिल से स्कूल जाने पर

  • चलनें से पहले पीछे, दायें, बायें अवश्य देखें।
  • साइकिल के आगे व पीछे रिफ्लेक्टर ठीक होने चाहिए।
  • साइकिल चलाने से पहले उसके टायरों व ब्रेक को ठीक से चेक कर लें।
  • साइकिल चलाते समय कान में इयरफोन लगाकर गाने न सुनें।

5. पैदल स्कूल आने-जानें में

  • सदैव फुटपाथ पर चलें, जहॉ पर फुटपाथ हो वहॉ पैदल चलनें वाले को बायीं ओर चलना चाहिए अन्यथा सड़क के दायीं ओर चलें।
  • सड़क पर धैर्य न खोएं और नही सड़क पर हड़बड़ी से दौड़े।
  • सड़क पार करते समय पहले दायें फिर बायें और फिर दायें देखकर तय कर लें कि दोनो ओर से कोई वाहन न आ रहा हो।
  • चौड़ी सड़कों जिनमें डिवाइडर हो, को पार करते समय हमेशा सड़क दो भागों में पार करें। डिवाइडर तक पार करें, रूके दूसरा भाग साफ हो तब पार करें।

6. बच्चों के माता-पिता की भूमिका

  • उन्हे सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूल द्वारा या उनके द्वारा बच्चो को ले जाने वाला साधन पूर्णतया सुरक्षित हैं।
  • माता-पिता को पी.टी.ए. मीटिंग में भाग लेना और बच्चों की सुरक्षा पहलुओं पर बात-चीत करनी चाहिए।
  • अपनें बच्चों को स्कूल से स्वयं लाते समय उन्हे उनकी पूर्ण सुरक्षा करनी चाहिए।
  • माता-पिता को अपने अवयस्क बच्चों को वाहन नहीं चलाने देना चाहिए।

7. स्कूल/कालेज प्रशासन की भूमिका

  • छात्र/छात्राओं, अध्यापक व उनके अभिभावकों को निजी वाहन से बच्चों को स्कूल छोड़ने के बजाय स्कूल वाहन व सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करनें हेतु प्रेरित किया जाय।
  • छुट्टी के समय छात्रों के स्कूल परिसर से बाहर निकलनें के लिए एक से अधिक गेट हों, खोले जायं।
  • प्रत्येक निकास द्वार को कक्षाओं के आधार पर बाहर निकलनें हेतु वर्गीकृत कर दिया जाय।
  • छात्रों के लिए निर्धारित गेट के बाहर उनकें वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था करयी जायं, कारें, स्कूटर, मोटर साइकिल तथा टैम्पो व बस आदि की पार्किंग के लिए अलग-अलग स्थान का निर्धारण किया जाय।
  • स्कूल के पास की सड़क पर सही मानदण्डों के अनुसार स्पीड ब्रेकर व जेब्रा क्रासिंग बनें हों तथा मुख्य स्थान पर सड़क संकेत का बोर्ड/स्टीकर लगाये जायं।
  • स्कूल में फस्ट एड बाक्स/फायर स्टीग्यूसर की व्यवस्था हो।
  • स्कूल वाहन चालक का बैध चालक लाइसेंस व वाहन चलानें का 05 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
  • चालक निर्धारित यूनिफार्म में हो तथा वाहन की फिटनेस वैध हो।
  • स्कूल बस में छात्र/छात्राओं के उतरने/चढ़ने में सहायता हेतु एक परिचालक हो।
  • स्कूल के पास गतिसीमा 25 किमी का यातायात चिन्ह का बोर्ड लगा हो।
  • छात्र/छात्राओं का प्रतिदिन असेम्बली के समय यातायात नियमों की जानकारी दिया जाय।
  • स्कूल वाहनों में एल0पी0जी0 का प्रयोग कदापि न हो।

वाराणसी ट्रैफिक पुलिस

OfficerPic

सुरेश चन्द्र रावत

एस.पी. ट्रैफिक पुलिस

Sahyog

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